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बेटियों खातिर कायम रहा रिश्ता
तलाक के बाद भी जिम्मेदार रिश्ते की मिसाल, बेटियों की परवरिश के लिए साथ आए ईशा और भरत
09 Jun 2026, 10:27 AM Maharashtra - Mumbai
Reporter : Mahesh Sharma
Mumbai

परिवार पहले रखने का साझा निर्णय

फिल्म जगत की चर्चित अभिनेत्री ईशा देओल ने अपने निजी जीवन को लेकर एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। वैवाहिक जीवन समाप्त होने के बाद भी उन्होंने अपने पूर्व पति भरत तख्तानी के साथ बच्चों की परवरिश को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही है। दोनों का वैवाहिक रिश्ता भले समाप्त हो गया हो, लेकिन माता-पिता की जिम्मेदारियों को लेकर उनका दृष्टिकोण अब भी समान दिखाई देता है। परिवार से जुड़े करीबी सूत्रों और सार्वजनिक बयानों से यह संकेत मिला है कि दोनों अपनी बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर निर्णय लेते हैं। आधुनिक समाज में ऐसे उदाहरण कम देखने को मिलते हैं जहां अलगाव के बाद भी दोनों पक्ष बच्चों के हितों को प्राथमिकता दें। यही कारण है कि यह विषय लोगों के बीच चर्चा का केंद्र बना हुआ है। परिवार और बच्चों की भावनात्मक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दोनों ने परिपक्वता का परिचय दिया है।

अलगाव के बाद भी कायम सहयोग

तलाक के बाद अक्सर रिश्तों में दूरी और संवाद की कमी देखने को मिलती है, लेकिन इस मामले में स्थिति कुछ अलग दिखाई देती है। दोनों पक्षों ने यह स्पष्ट किया है कि बच्चों की खुशहाली उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण है। इसी सोच के तहत वे आवश्यक अवसरों पर साथ दिखाई देते हैं और बच्चों से जुड़े फैसले मिलकर लेते हैं। सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार की सह-अभिभावक व्यवस्था बच्चों को भावनात्मक स्थिरता प्रदान करती है। इससे उन्हें यह महसूस नहीं होता कि परिवार पूरी तरह बिखर गया है। परिवार के भीतर सहयोग और सम्मान की भावना बच्चों के मानसिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यही कारण है कि दोनों का यह दृष्टिकोण सकारात्मक उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।

बेटियों की खुशियों को दी प्राथमिकता

अभिनेत्री ने अपने विचारों में यह स्पष्ट किया कि उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण उनकी बेटियां हैं। बच्चों की शिक्षा, परवरिश और भावनात्मक विकास से जुड़े निर्णयों में दोनों माता-पिता की भागीदारी बनी हुई है। विशेषज्ञों के अनुसार जब माता-पिता अलग होने के बाद भी बच्चों के जीवन में सक्रिय भूमिका निभाते हैं, तो बच्चों पर नकारात्मक प्रभाव अपेक्षाकृत कम पड़ता है। यही कारण है कि दोनों अपने व्यक्तिगत मतभेदों को बच्चों के भविष्य से अलग रखने का प्रयास कर रहे हैं। यह सोच आधुनिक पारिवारिक मूल्यों की नई तस्वीर भी प्रस्तुत करती है, जहां संबंधों की परिभाषा केवल वैवाहिक स्थिति तक सीमित नहीं रहती बल्कि जिम्मेदारियों के निर्वहन पर भी आधारित होती है।

निजी जीवन पर खुलकर रखे विचार

हाल के दिनों में अभिनेत्री ने अपने जीवन के उतार-चढ़ाव और अनुभवों पर खुलकर चर्चा की। उन्होंने बताया कि जीवन में बदलाव आना स्वाभाविक है, लेकिन परिस्थितियों के अनुसार सकारात्मक दृष्टिकोण बनाए रखना महत्वपूर्ण होता है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि किसी रिश्ते का स्वरूप बदल जाने का अर्थ यह नहीं कि सम्मान और सहयोग पूरी तरह समाप्त हो जाए। उनके विचारों को कई लोगों ने परिपक्व और संतुलित दृष्टिकोण के रूप में देखा। सार्वजनिक जीवन से जुड़े व्यक्तित्वों के निजी अनुभव अक्सर समाज में चर्चा का विषय बनते हैं और लोगों को सोचने का नया नजरिया भी प्रदान करते हैं। इसी कारण उनके वक्तव्य को व्यापक प्रतिक्रिया मिली है।

को-पैरेंटिंग मॉडल पर बढ़ी चर्चा

इस घटनाक्रम के बाद सह-अभिभावक व्यवस्था यानी को-पैरेंटिंग को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में कई परिवार इस मॉडल को अपनाने लगे हैं। इसका उद्देश्य बच्चों को दोनों माता-पिता का सहयोग और मार्गदर्शन उपलब्ध कराना होता है। इस व्यवस्था में आपसी सम्मान, संवाद और सहयोग बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यदि दोनों पक्ष सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ें तो बच्चों के विकास के लिए बेहतर वातावरण तैयार किया जा सकता है। यही वजह है कि समाजशास्त्री और पारिवारिक सलाहकार इस मॉडल को कई परिस्थितियों में उपयोगी मानते हैं। हालांकि इसकी सफलता पूरी तरह दोनों पक्षों की समझदारी और सहयोग पर निर्भर करती है।

सम्मान और जिम्मेदारी का संदेश

यह पूरा घटनाक्रम केवल एक फिल्मी हस्ती के निजी जीवन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज के लिए भी एक महत्वपूर्ण संदेश देता है। रिश्तों में बदलाव आने के बावजूद जिम्मेदारियों का निर्वहन और बच्चों के हितों को प्राथमिकता देना सकारात्मक सोच का परिचायक माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि परिवार की संरचना चाहे जैसी हो, बच्चों को प्रेम, सुरक्षा और मार्गदर्शन मिलना सबसे आवश्यक है। ईशा देओल और भरत तख्तानी का उदाहरण इसी दिशा में एक परिपक्व दृष्टिकोण को दर्शाता है। आने वाले समय में भी दोनों अपनी बेटियों के बेहतर भविष्य के लिए मिलकर जिम्मेदारी निभाते रहेंगे, ऐसी उम्मीद जताई जा रही है। यह कहानी रिश्तों में सम्मान, सहयोग और पारिवारिक मूल्यों की अहमियत को एक बार फिर रेखांकित करती है।

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