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सांस्कृतिक विरासत संरक्षण का दिया संदेश
लखनऊ में आयोजित नौ दिवसीय श्री राम कथा महोत्सव के समापन अवसर पर मुख्यमंत्री ने जनसभा को संबोधित करते हुए भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय मूल्यों के महत्व पर विस्तार से अपने विचार रखे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालु, संत-महात्मा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि भारत की पहचान उसकी सांस्कृतिक विरासत, आध्यात्मिक चेतना और सामाजिक समरसता से जुड़ी हुई है। उन्होंने लोगों से आग्रह किया कि वे अपने जीवन में मर्यादा, अनुशासन और राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दें। कार्यक्रम का वातावरण धार्मिक और सांस्कृतिक रंग में रंगा हुआ दिखाई दिया।
प्राचीन आदर्शों का आधुनिक संदर्भ बताया
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान रामायण काल के विभिन्न पात्रों और घटनाओं का उल्लेख करते हुए वर्तमान समय की चुनौतियों पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारतीय ग्रंथ केवल धार्मिक पुस्तकें नहीं हैं, बल्कि जीवन को दिशा देने वाले मार्गदर्शक भी हैं। उन्होंने भगवान राम के आदर्शों को समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताते हुए कहा कि सत्य, न्याय और कर्तव्यनिष्ठा आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं जितनी प्राचीन काल में थीं। उनके अनुसार समाज को उन मूल्यों को अपनाने की आवश्यकता है जो एक मजबूत और संगठित राष्ट्र के निर्माण में सहायक हों।
देशहित सर्वोपरि रखने की अपील की
सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय आस्था और देश के प्रति समर्पण की भावना पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है कि वह देश की एकता, अखंडता और सम्मान को सर्वोपरि रखे। उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्र निर्माण केवल सरकारों की जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज के प्रत्येक वर्ग की सहभागिता से संभव होता है। उनके वक्तव्य में देशभक्ति, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक उत्तरदायित्व जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल रहे। उपस्थित लोगों ने उनके विचारों का स्वागत किया।
नकारात्मक प्रवृत्तियों से सावधान रहने आग्रह
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने समाज में बढ़ रही कुछ चुनौतियों और नकारात्मक गतिविधियों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज को ऐसी प्रवृत्तियों के प्रति जागरूक और सतर्क रहने की आवश्यकता है जो सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे राष्ट्रहित, शिक्षा, नैतिकता और सामाजिक सेवा को अपने जीवन का आधार बनाएं। उनके अनुसार जागरूक समाज ही किसी भी प्रकार की चुनौती का प्रभावी ढंग से सामना कर सकता है।
सामाजिक एकता मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन केवल आस्था के कार्यक्रम नहीं होते, बल्कि वे समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम भी हैं। ऐसे आयोजनों से लोगों में नैतिक मूल्यों का विकास होता है और सामाजिक सौहार्द को मजबूती मिलती है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति हमेशा से विविधता में एकता का संदेश देती रही है। इसी भावना को आगे बढ़ाने के लिए समाज के सभी वर्गों को मिलकर कार्य करना चाहिए। कार्यक्रम में उपस्थित संतों और विद्वानों ने भी सांस्कृतिक संरक्षण के महत्व पर अपने विचार रखे।
श्रद्धालुओं की बड़ी भागीदारी रही
श्री राम कथा महोत्सव के समापन समारोह में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखने को मिली। पूरे आयोजन में धार्मिक अनुष्ठान, प्रवचन और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का आयोजन किया गया। समापन अवसर पर उपस्थित लोगों ने भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं के संरक्षण का संकल्प भी दोहराया। कार्यक्रम का मुख्य संदेश सामाजिक एकता, सांस्कृतिक जागरूकता और राष्ट्रहित की भावना को मजबूत करना रहा। आयोजन शांतिपूर्ण और उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ तथा प्रतिभागियों ने इसे प्रेरणादायक बताया।
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