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याचिका खारिज हुई
सुप्रीम कोर्ट सख्त, चुनाव रद्द मांग नामंजूर, जन सुराज को फटकार
National (India) / राष्ट्रीय (भारत)
Bihar -
Patna
बिहार चुनाव याचिका खारिज, सुप्रीम कोर्ट ने जन सुराज पार्टी से तीखे सवाल पूछे
06 Feb 2026, 06:48 AM
Portal : Jagat Vichar
Reporter :
Mahesh Sharma
Patna बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द करने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उसे खारिज कर दिया। यह याचिका प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली जन सुराज पार्टी से जुड़ी थी। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता से तीखे सवाल पूछे और कहा कि अदालत का इस्तेमाल राजनीतिक लोकप्रियता हासिल करने के मंच के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि याचिका दायर करने वाली पार्टी को चुनाव में कितने वोट मिले और उसका वास्तविक जनाधार क्या है। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि चुनावी परिणामों से असहमति के आधार पर पूरी चुनाव प्रक्रिया को रद्द करने की मांग स्वीकार्य नहीं हो सकती।
जन सुराज पार्टी की ओर से पेश वकील ने अदालत में आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू रहने के बावजूद सरकारी योजनाओं के तहत महिला मतदाताओं के खातों में सीधे धनराशि ट्रांसफर की गई। याचिका में दावा किया गया कि इस प्रक्रिया के तहत लगभग 15,600 करोड़ रुपये महिलाओं के बैंक खातों में भेजे गए, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम था।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी योजना को लेकर आपत्ति है तो उसके लिए वैधानिक और संवैधानिक मंच उपलब्ध हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और बिना ठोस सबूतों के पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग नहीं की जा सकती।
अदालत ने टिप्पणी की कि हाल के दिनों में कोर्ट का सहारा केवल सुर्खियां बटोरने के लिए लिया जा रहा है, जो न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और अदालतें केवल गंभीर संवैधानिक उल्लंघनों के मामलों में ही हस्तक्षेप करती हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि चुनावी योजनाओं और सरकारी लाभों से जुड़े मामलों को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में नहीं बल्कि कानूनी कसौटी पर परखा जाना चाहिए। यदि किसी योजना में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसके लिए उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
अंततः सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द किया जा सके। अदालत के इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में स्थिरता और न्यायिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि याचिका दायर करने वाली पार्टी को चुनाव में कितने वोट मिले और उसका वास्तविक जनाधार क्या है। अदालत ने यह टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया कि चुनावी परिणामों से असहमति के आधार पर पूरी चुनाव प्रक्रिया को रद्द करने की मांग स्वीकार्य नहीं हो सकती।
जन सुराज पार्टी की ओर से पेश वकील ने अदालत में आरोप लगाया कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू रहने के बावजूद सरकारी योजनाओं के तहत महिला मतदाताओं के खातों में सीधे धनराशि ट्रांसफर की गई। याचिका में दावा किया गया कि इस प्रक्रिया के तहत लगभग 15,600 करोड़ रुपये महिलाओं के बैंक खातों में भेजे गए, जो चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने वाला कदम था।
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यदि किसी योजना को लेकर आपत्ति है तो उसके लिए वैधानिक और संवैधानिक मंच उपलब्ध हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि ऐसे मामलों में चुनाव आयोग की भूमिका महत्वपूर्ण होती है और बिना ठोस सबूतों के पूरे चुनाव को रद्द करने की मांग नहीं की जा सकती।
अदालत ने टिप्पणी की कि हाल के दिनों में कोर्ट का सहारा केवल सुर्खियां बटोरने के लिए लिया जा रहा है, जो न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में जनता का फैसला सर्वोपरि होता है और अदालतें केवल गंभीर संवैधानिक उल्लंघनों के मामलों में ही हस्तक्षेप करती हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी संकेत दिया कि चुनावी योजनाओं और सरकारी लाभों से जुड़े मामलों को व्यापक राजनीतिक संदर्भ में नहीं बल्कि कानूनी कसौटी पर परखा जाना चाहिए। यदि किसी योजना में नियमों का उल्लंघन हुआ है तो उसके लिए उचित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए।
अंततः सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि इसमें ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है, जिससे बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को रद्द किया जा सके। अदालत के इस फैसले को लोकतांत्रिक प्रक्रिया में स्थिरता और न्यायिक संतुलन बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।