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ब्रेकिंग न्यूज
अमेरिका से डील के बीच रूस ने भारत को सस्ते तेल का ऑफर दिया
International / अंतरराष्ट्रीय
Moscow -
Moscow
अमेरिकी टैरिफ राहत के बीच रूस ने भारत को साधने के लिए तेल कीमतों में बड़ी छूट दी
06 Feb 2026, 08:36 AM
Portal : Jagat Vichar
Reporter :
Mahesh Sharma
Moscow अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक समझौते की आहट के बीच वैश्विक राजनीति में एक नया समीकरण उभरता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए कुल 50 प्रतिशत टैरिफ को घटाकर 18 प्रतिशत करने के फैसले ने अंतरराष्ट्रीय बाजारों में हलचल पैदा कर दी है। इस फैसले में रूसी तेल की खरीद को लेकर भारत पर लगाया गया 25 प्रतिशत दंडात्मक टैरिफ हटाया जाना भी शामिल है।
इसी बीच रूस ने भारत को अपने रणनीतिक पाले में बनाए रखने के लिए एक अहम चाल चली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने भारतीय रिफाइनरियों को दिए जाने वाले कच्चे तेल पर छूट और बढ़ा दी है। एनालिटिक्स फर्म आर्गस के अनुसार, रूस के प्रमुख कच्चे तेल ‘यूराल्स’ पर मिलने वाली छूट अब बढ़कर लगभग 11 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि जनवरी के मध्य तक यह छूट करीब 9.15 डॉलर प्रति बैरल थी।
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस के लिए एशियाई बाजार, खासकर भारत, बेहद अहम हो गया है। यही वजह है कि रूस लगातार कीमतों में छूट देकर भारतीय बाजार को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि हाल के महीनों में अमेरिकी प्रतिबंधों और वैश्विक दबाव के चलते भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में कुछ गिरावट जरूर देखी गई है, लेकिन जनवरी 2026 में भारत ने औसतन करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल का आयात किया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि रूस-भारत ऊर्जा संबंध अभी भी मजबूत बने हुए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर रूस के विदेश नीति विश्लेषकों का मानना है कि मॉस्को भारत को केवल एक खरीदार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। रूस यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भारत, अमेरिका के साथ बढ़ते संबंधों के बावजूद, ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह पश्चिमी देशों पर निर्भर न हो।
उधर भारत भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बहु-विकल्पीय रणनीति अपना रहा है। हाल ही में देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद शुरू करने की खबरें सामने आई हैं। इससे साफ है कि भारत किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय कई स्रोतों से तेल आयात कर संतुलन बनाए रखना चाहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भारत, अमेरिका और रूस के बीच त्रिकोणीय कूटनीति और जटिल हो सकती है। एक ओर अमेरिका भारत को रणनीतिक साझेदार के रूप में मजबूत करना चाहता है, वहीं रूस सस्ते तेल और ऊर्जा सहयोग के जरिए भारत को अपने करीब बनाए रखने की हरसंभव कोशिश कर रहा है।
कुल मिलाकर, वैश्विक राजनीति के इस बदलते परिदृश्य में भारत की भूमिका बेहद अहम होती जा रही है, जहां हर बड़ा देश उसे अपने पक्ष में करने के लिए नई-नई रणनीतियां अपना रहा है।
इसी बीच रूस ने भारत को अपने रणनीतिक पाले में बनाए रखने के लिए एक अहम चाल चली है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस ने भारतीय रिफाइनरियों को दिए जाने वाले कच्चे तेल पर छूट और बढ़ा दी है। एनालिटिक्स फर्म आर्गस के अनुसार, रूस के प्रमुख कच्चे तेल ‘यूराल्स’ पर मिलने वाली छूट अब बढ़कर लगभग 11 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है, जबकि जनवरी के मध्य तक यह छूट करीब 9.15 डॉलर प्रति बैरल थी।
यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद से रूस भारत का सबसे बड़ा कच्चा तेल आपूर्तिकर्ता बनकर उभरा है। पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के चलते रूस के लिए एशियाई बाजार, खासकर भारत, बेहद अहम हो गया है। यही वजह है कि रूस लगातार कीमतों में छूट देकर भारतीय बाजार को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है।
हालांकि हाल के महीनों में अमेरिकी प्रतिबंधों और वैश्विक दबाव के चलते भारत द्वारा रूसी तेल की खरीद में कुछ गिरावट जरूर देखी गई है, लेकिन जनवरी 2026 में भारत ने औसतन करीब 12 लाख बैरल प्रतिदिन रूसी तेल का आयात किया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि रूस-भारत ऊर्जा संबंध अभी भी मजबूत बने हुए हैं।
इस पूरे घटनाक्रम पर रूस के विदेश नीति विश्लेषकों का मानना है कि मॉस्को भारत को केवल एक खरीदार नहीं, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रहा है। रूस यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भारत, अमेरिका के साथ बढ़ते संबंधों के बावजूद, ऊर्जा जरूरतों के लिए पूरी तरह पश्चिमी देशों पर निर्भर न हो।
उधर भारत भी अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बहु-विकल्पीय रणनीति अपना रहा है। हाल ही में देश की सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा वेनेजुएला से कच्चे तेल की खरीद शुरू करने की खबरें सामने आई हैं। इससे साफ है कि भारत किसी एक देश पर निर्भर रहने के बजाय कई स्रोतों से तेल आयात कर संतुलन बनाए रखना चाहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में भारत, अमेरिका और रूस के बीच त्रिकोणीय कूटनीति और जटिल हो सकती है। एक ओर अमेरिका भारत को रणनीतिक साझेदार के रूप में मजबूत करना चाहता है, वहीं रूस सस्ते तेल और ऊर्जा सहयोग के जरिए भारत को अपने करीब बनाए रखने की हरसंभव कोशिश कर रहा है।
कुल मिलाकर, वैश्विक राजनीति के इस बदलते परिदृश्य में भारत की भूमिका बेहद अहम होती जा रही है, जहां हर बड़ा देश उसे अपने पक्ष में करने के लिए नई-नई रणनीतियां अपना रहा है।