Search News
Tip: Search by heading, content, category, city, state, highlights.
दरभंगा एम्स निर्माण पर बढ़े सवाल
दरभंगा एम्स परियोजना पर उठे सवाल, शिलान्यास के डेढ़ साल बाद भी मुख्य अस्पताल निर्माण शुरू नहीं हुआ
28 May 2026, 11:26 AM Bihar - Darbhanga
Reporter : Mahesh Sharma
Darbhanga

घोषणा के वर्षों बाद भी अधूरा सपना

बिहार में दूसरे एम्स के रूप में दरभंगा एम्स की घोषणा को करीब एक दशक से ज्यादा समय बीत चुका है, लेकिन आज भी यह परियोजना पूरी तरह जमीन पर उतरती दिखाई नहीं दे रही है। शिलान्यास कार्यक्रम होने और बड़े स्तर पर राजनीतिक घोषणाएं किए जाने के बावजूद मुख्य अस्पताल और अकादमिक भवनों का निर्माण कार्य अब तक शुरू नहीं हो सका है। इस स्थिति ने स्थानीय लोगों और स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों के बीच कई सवाल खड़े कर दिए हैं। दरभंगा समेत मिथिलांचल क्षेत्र के लोग लंबे समय से आधुनिक स्वास्थ्य सुविधाओं की उम्मीद लगाए बैठे हैं, लेकिन परियोजना की धीमी रफ्तार से लोगों में निराशा बढ़ती जा रही है। हाल ही में सामने आए दस्तावेजों और जानकारी ने इस परियोजना की वास्तविक स्थिति पर नई बहस छेड़ दी है। लोगों का कहना है कि यदि समय पर निर्माण कार्य पूरा हो जाता तो लाखों मरीजों को बड़े शहरों की ओर नहीं जाना पड़ता। फिलहाल परियोजना स्थल पर सीमित गतिविधियां ही दिखाई दे रही हैं, जबकि मुख्य निर्माण कार्य को लेकर अब भी स्पष्ट तस्वीर सामने नहीं आई है। प्रशासनिक स्तर पर भी लगातार बैठकों और समीक्षा का दौर जारी है।

शिलान्यास के बाद भी जमीन पर नहीं दिखा काम

दरभंगा एम्स परियोजना का शिलान्यास बड़े स्तर पर किया गया था और इसे बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में ऐतिहासिक कदम बताया गया था। लेकिन डेढ़ साल से अधिक समय गुजरने के बाद भी मुख्य अस्पताल भवन का निर्माण कार्य शुरू नहीं हो पाया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस तेज गति से काम शुरू होने की उम्मीद थी, वैसा कुछ भी जमीन पर नजर नहीं आ रहा। परियोजना स्थल पर कुछ प्रारंभिक गतिविधियां जरूर हुईं, लेकिन मुख्य सिविल कार्य अब तक अधर में लटका हुआ है। इस बीच सामने आई आरटीआई जानकारी ने भी कई अहम सवाल खड़े किए हैं। जानकारी के अनुसार निर्माण से जुड़े कई पहलुओं पर अब तक स्पष्ट निर्णय नहीं हो पाया है। खासतौर पर परियोजना से जुड़े प्रसिद्ध प्रवेश द्वार की संरचना और उसकी मंजूरी को लेकर भी स्थिति साफ नहीं हो सकी है। लोगों का कहना है कि केवल प्रतीकात्मक निर्माण और घोषणाओं से क्षेत्र की स्वास्थ्य समस्याओं का समाधान संभव नहीं है। मिथिलांचल क्षेत्र के मरीज आज भी बेहतर इलाज के लिए पटना, दिल्ली और दूसरे बड़े शहरों की ओर जाने को मजबूर हैं।

आरटीआई रिपोर्ट ने बढ़ाई प्रशासनिक मुश्किलें

हाल ही में सामने आई आरटीआई रिपोर्ट ने दरभंगा एम्स परियोजना को लेकर नई बहस शुरू कर दी है। रिपोर्ट में कई ऐसे सवाल सामने आए हैं जिनका स्पष्ट जवाब अब तक नहीं मिल पाया है। विशेष रूप से परियोजना के मुख्य गेट की डिजाइन और उसकी स्वीकृति को लेकर स्थिति अस्पष्ट बनी हुई है। रिपोर्ट में यह भी संकेत मिला है कि शिलान्यास समारोह के बावजूद मुख्य निर्माण कार्य की प्रक्रिया पूरी तरह आगे नहीं बढ़ सकी। इससे प्रशासनिक स्तर पर कार्यप्रणाली और योजना निर्माण पर सवाल उठने लगे हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी परियोजना में पारदर्शिता और स्पष्ट कार्ययोजना बेहद जरूरी होती है। यदि समय रहते सभी प्रक्रियाएं पूरी नहीं की गईं तो निर्माण कार्य में और देरी हो सकती है। दूसरी ओर स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि राजनीतिक घोषणाओं के मुकाबले जमीन पर काम बेहद धीमी गति से चल रहा है। आरटीआई के सामने आने के बाद विपक्षी दलों ने भी सरकार पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं और परियोजना की वास्तविक प्रगति सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है।

मिथिलांचल के लोगों को अब भी इंतजार

दरभंगा एम्स को मिथिलांचल क्षेत्र की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ा बदलाव लाने वाली परियोजना माना जा रहा था। उम्मीद थी कि इसके शुरू होने के बाद बिहार के उत्तरी हिस्से के लोगों को बड़े शहरों में इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा। लेकिन वर्षों बीत जाने के बाद भी परियोजना अधूरी होने से लोगों में नाराजगी बढ़ रही है। स्थानीय नागरिकों का कहना है कि क्षेत्र में गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए आज भी पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। कई मरीजों को समय पर इलाज नहीं मिल पाने के कारण परेशानी झेलनी पड़ती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दरभंगा एम्स समय पर बनकर तैयार हो जाए तो इससे पूरे इलाके की स्वास्थ्य सेवाओं में बड़ा सुधार हो सकता है। मेडिकल शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी यह परियोजना महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। हालांकि फिलहाल निर्माण की धीमी गति और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में देरी लोगों की उम्मीदों पर असर डाल रही है। क्षेत्र के सामाजिक संगठनों ने भी सरकार से निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है।

राजनीतिक बयान और जमीनी हकीकत में अंतर

दरभंगा एम्स परियोजना को लेकर समय-समय पर कई बड़े राजनीतिक बयान दिए गए। इसे बिहार के विकास और स्वास्थ्य क्षेत्र की बड़ी उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत किया गया। लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति अब भी उम्मीदों के अनुरूप दिखाई नहीं दे रही है। परियोजना के शिलान्यास के दौरान बड़े स्तर पर दावे किए गए थे कि जल्द ही निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा, लेकिन अब तक मुख्य अस्पताल भवन और अकादमिक ढांचे का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। इस कारण विपक्षी दल लगातार सरकार को घेरने की कोशिश कर रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि इतनी महत्वपूर्ण परियोजना में देरी का असर आने वाले समय में राजनीतिक तौर पर भी दिखाई दे सकता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें केवल घोषणाएं नहीं बल्कि वास्तविक स्वास्थ्य सुविधाएं चाहिए। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि परियोजना से जुड़ी प्रक्रियाएं लगातार चल रही हैं और जल्द ही निर्माण कार्य में तेजी लाई जाएगी। हालांकि लोगों के बीच अब भी असमंजस की स्थिति बनी हुई है।

अब लोगों की नजर अगले बड़े फैसले पर

दरभंगा एम्स परियोजना को लेकर अब लोगों की नजर सरकार और प्रशासन के अगले कदम पर टिकी हुई है। क्षेत्र के नागरिक चाहते हैं कि निर्माण कार्य जल्द शुरू हो और परियोजना को तय समयसीमा में पूरा किया जाए। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार जैसे बड़े राज्य में बेहतर चिकित्सा संस्थानों की बेहद जरूरत है और दरभंगा एम्स इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। फिलहाल प्रशासनिक स्तर पर परियोजना की समीक्षा जारी है और संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाने की कोशिश की जा रही है। लोगों को उम्मीद है कि आने वाले समय में निर्माण कार्य में तेजी दिखाई देगी और वर्षों से लंबित यह परियोजना आखिरकार जमीन पर उतर पाएगी। स्थानीय संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी सरकार से पारदर्शिता बनाए रखने और नियमित प्रगति रिपोर्ट जारी करने की मांग की है। पूरे मिथिलांचल क्षेत्र में अब यह परियोजना उम्मीद और इंतजार दोनों का प्रतीक बन चुकी है। आने वाले महीनों में सरकार के फैसले यह तय करेंगे कि दरभंगा एम्स का सपना कब तक हकीकत बन पाता है।

Latest News

Feed shows today's latest first, then previous days to complete up to 50 items.
thumb
टीएमसी में बगावत के बीच शत्रुघ्न सिन्हा की चुप्पी बनी रहस्य, राजनीतिक हलचल तेज, ममता बनर्जी के खेमे में चर्चा
June 09, 2026
thumb
शादी से पांच दिन पहले प्रेम कहानी का दर्दनाक अंत कपल ने होटल में जहरीला पदार्थ खाया घटना सामने आई
June 09, 2026
thumb
पत्नी की मृत्यु के बाद भावुक पराग त्यागी का श्मशान घाट दौरा, व्लॉग में आत्माओं और आस्था को लेकर चर्चा बढ़ी
June 09, 2026
thumb
दुनिया में बैन जहरीला Paraquat Dichloride भारत के खेतों में अब भी इस्तेमाल, किसानों और स्वास्थ्य पर बड़ा खतरा
June 09, 2026
thumb
टीएमसी में बगावत के बीच कल्याण बनर्जी और कीर्ति आजाद का बड़ा हमला, बागी सांसदों से खुली चुनौती
June 09, 2026
thumb
पंचायत से संसद तक फैली बगावत, टीएमसी में टूट के संकेत, नेताओं के पाला बदलने से ममता बनर्जी पर बढ़ा दबाव
June 09, 2026
thumb
उत्तराखंड में निकाह बना दर्दनाक हादसा, दहेज और हक मेहर विवाद में दुल्हन के पिता की हार्ट अटैक से मौत
June 09, 2026
thumb
मुंबई में मानसून की दस्तक नजदीक, मौसम विभाग ने जारी किया बारिश अलर्ट, कई जिलों में तेज हवाओं का अनुमान
June 09, 2026
thumb
दाऊदी बोहरा फैसले के बाद पूर्व जज गौतम पटेल को जान से मारने की धमकी, परिवार पर हमले का डर बढ़ा
June 09, 2026
thumb
नवी मुंबई एयरपोर्ट उद्घाटन न्योते विवाद से महायुति में बढ़ी अंदरूनी खटास, शिंदे-फडणवीस रिश्तों पर फिर उठे सवाल
June 09, 2026