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ब्रेकिंग न्यूज पीएम मोदी ने लंबे भाषण में कांग्रेस और विपक्षी नेताओं को घेरा Politics / राजनीति 4021 - New Delhi
राज्यसभा में पीएम मोदी का आक्रामक अंदाज़, विपक्षी नेताओं पर तीखे और सीधे हमले
06 Feb 2026, 10:21 AM
Portal : Jagat Vichar Reporter : Mahesh Sharma
New Delhi प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार शाम राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का जवाब देते हुए करीब 1 घंटे 37 मिनट लंबा भाषण दिया। इस दौरान प्रधानमंत्री का रुख बेहद आक्रामक रहा और उनके निशाने पर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल और नेता रहे। भाषण में विकास, राष्ट्रवाद और भविष्य की योजनाओं के साथ-साथ राजनीतिक कटाक्ष भी देखने को मिले।

प्रधानमंत्री मोदी ने बिना नाम लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर तंज कसते हुए कांग्रेस की कार्यशैली और नेतृत्व पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ नेता वास्तविकता से कटे हुए हैं और देश की जनता के भरोसे को बार-बार ठेस पहुंचा रहे हैं। पीएम मोदी ने कांग्रेस पर परिवारवाद, भ्रम फैलाने और देश की उपलब्धियों को नकारने का आरोप लगाया।

भाषण के दौरान प्रधानमंत्री ने आम आदमी पार्टी पर भी अप्रत्यक्ष हमला किया। दिल्ली की राजनीति का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि कुछ दल सिर्फ शोर मचाने की राजनीति करते हैं और संसद की गरिमा को समझने में नाकाम रहते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि जनता अब दिखावे और खोखले वादों से आगे बढ़ चुकी है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर भी प्रधानमंत्री मोदी ने तीखा हमला बोला। घुसपैठ और सीमा सुरक्षा के मुद्दे पर उन्होंने तृणमूल कांग्रेस की सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा से समझौता नहीं किया जा सकता। प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सुरक्षा और सामाजिक संतुलन सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

पीएम मोदी ने अपने भाषण में 2047 तक विकसित भारत के संकल्प को दोहराया और कहा कि सरकार स्पष्ट विज़न और ठोस नीतियों के साथ आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि कुछ राजनीतिक दल निराशा और भ्रम फैलाकर देश की प्रगति को रोकना चाहते हैं, लेकिन जनता अब सच और झूठ में फर्क करना जानती है।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि उनकी सरकार ने गरीबों, किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए ठोस फैसले लिए हैं, जबकि विपक्ष सिर्फ नकारात्मक राजनीति में उलझा हुआ है। उन्होंने जोर देकर कहा कि लोकतंत्र में आलोचना जरूरी है, लेकिन निरंतर अविश्वास फैलाना देशहित में नहीं है।

प्रधानमंत्री के भाषण के दौरान सत्ता पक्ष के सांसदों ने कई बार मेज थपथपाकर समर्थन जताया, वहीं विपक्ष ने भी कुछ बयानों पर आपत्ति दर्ज कराई। कुल मिलाकर, यह भाषण न सिर्फ सरकार की उपलब्धियों का बखान था, बल्कि आगामी राजनीतिक मुकाबलों के संकेत भी देता नजर आया।