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प्रियंका बोलीं– पीएम मोदी सदन से बच रहे हैं
स्पीकर की टिप्पणी पर प्रियंका गांधी का मोदी पर तीखा हमला
Politics / राजनीति
Delhi -
New Delhi
लोकसभा स्पीकर की टिप्पणी पर प्रियंका गांधी का पलटवार, बोलीं– पीएम मोदी सदन में आने से छिप रहे हैं
05 Feb 2026, 12:38 PM
Portal : Jagat Vichar
Reporter :
Mahesh Sharma
New Delhi कांग्रेस महासचिव और सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की टिप्पणी को लेकर केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला बोला है। गुरुवार को संसद परिसर में मीडिया से बातचीत करते हुए प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जानबूझकर संसद की कार्यवाही से दूर रह रहे हैं और सरकार स्पीकर के माध्यम से विपक्ष को निशाना बना रही है।
प्रियंका गांधी ने स्पीकर ओम बिरला के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने विपक्षी सदस्यों के आचरण को “काला धब्बा” बताया था। प्रियंका ने सवाल उठाया कि जब विपक्ष शांतिपूर्वक अपनी बात रखना चाहता है, तो फिर लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की आवाज का समान महत्व होता है।
कांग्रेस महासचिव ने कहा, “प्रधानमंत्री में बुधवार को सदन में आने का साहस नहीं था, इसलिए सरकार स्पीकर से इस तरह की टिप्पणियां दिलवा रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी संसद से “छिप रहे हैं” और संवैधानिक सवालों का जवाब देने से बच रहे हैं। प्रियंका ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री को किसी तरह की चोट पहुंचाने का सवाल ही नहीं उठता, लेकिन सदन में बहस और जवाबदेही जरूरी है।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने से रोकना न केवल संसदीय परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि यह लोकतंत्र की मूल भावना पर भी आघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आलोचना से डर रही है और इसलिए विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने स्पीकर की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को निष्पक्ष रहना चाहिए और सभी दलों को समान अवसर देना चाहिए। प्रियंका के मुताबिक, जब स्पीकर सरकार की भाषा बोलते नजर आते हैं, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि विपक्ष का काम सवाल उठाना है और सरकार का दायित्व है कि वह उन सवालों का जवाब दे। अगर प्रधानमंत्री संसद में उपस्थित नहीं होते और जवाब देने से बचते हैं, तो यह जनता के विश्वास के साथ धोखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद कोई एक पार्टी की जागीर नहीं है, बल्कि यह देश की जनता की आवाज का मंच है।
इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। विपक्ष जहां सरकार पर तानाशाही रवैये का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगा रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होने के आसार हैं।
प्रियंका गांधी के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस और विपक्ष सरकार पर संसद में जवाबदेही तय करने का दबाव लगातार बनाए रखने के मूड में हैं।
प्रियंका गांधी ने स्पीकर ओम बिरला के उस बयान पर कड़ी आपत्ति जताई, जिसमें उन्होंने विपक्षी सदस्यों के आचरण को “काला धब्बा” बताया था। प्रियंका ने सवाल उठाया कि जब विपक्ष शांतिपूर्वक अपनी बात रखना चाहता है, तो फिर लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने से क्यों रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की आवाज का समान महत्व होता है।
कांग्रेस महासचिव ने कहा, “प्रधानमंत्री में बुधवार को सदन में आने का साहस नहीं था, इसलिए सरकार स्पीकर से इस तरह की टिप्पणियां दिलवा रही है।” उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी संसद से “छिप रहे हैं” और संवैधानिक सवालों का जवाब देने से बच रहे हैं। प्रियंका ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री को किसी तरह की चोट पहुंचाने का सवाल ही नहीं उठता, लेकिन सदन में बहस और जवाबदेही जरूरी है।
प्रियंका गांधी ने यह भी कहा कि लोकसभा में विपक्ष के नेता को बोलने से रोकना न केवल संसदीय परंपराओं के खिलाफ है, बल्कि यह लोकतंत्र की मूल भावना पर भी आघात है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार आलोचना से डर रही है और इसलिए विपक्ष की आवाज दबाने की कोशिश कर रही है।
उन्होंने स्पीकर की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि लोकसभा अध्यक्ष को निष्पक्ष रहना चाहिए और सभी दलों को समान अवसर देना चाहिए। प्रियंका के मुताबिक, जब स्पीकर सरकार की भाषा बोलते नजर आते हैं, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन जाता है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि विपक्ष का काम सवाल उठाना है और सरकार का दायित्व है कि वह उन सवालों का जवाब दे। अगर प्रधानमंत्री संसद में उपस्थित नहीं होते और जवाब देने से बचते हैं, तो यह जनता के विश्वास के साथ धोखा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद कोई एक पार्टी की जागीर नहीं है, बल्कि यह देश की जनता की आवाज का मंच है।
इस पूरे घटनाक्रम ने संसद के भीतर और बाहर राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। विपक्ष जहां सरकार पर तानाशाही रवैये का आरोप लगा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष विपक्ष पर सदन की कार्यवाही बाधित करने का आरोप लगा रहा है। आने वाले दिनों में यह टकराव और तेज होने के आसार हैं।
प्रियंका गांधी के इस बयान से साफ है कि कांग्रेस और विपक्ष सरकार पर संसद में जवाबदेही तय करने का दबाव लगातार बनाए रखने के मूड में हैं।