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ब्रेकिंग न्यूज रात में मदद नहीं मिली, सुबह हुआ खुलासा, सड़क पर मौत का जाल Crime / अपराध Delhi - Rohini
दिल्ली की लापरवाही ले गई जान, खुले गड्ढे में गिरकर युवक की दर्दनाक मौत
06 Feb 2026, 07:18 AM
Portal : Jagat Vichar Reporter : Mahesh Sharma
Rohini राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही ने एक निर्दोष की जान ले ली। रोहिणी इलाके में खुले और बिना बैरिकेडिंग वाले गड्ढे में गिरने से कमल नामक युवक की दर्दनाक मौत हो गई। यह हादसा सोमवार देर रात उस वक्त हुआ, जब कमल अपने दफ्तर से रोज की तरह घर लौट रहा था।

परिवार के मुताबिक, कमल का रोजाना का रूट और समय तय था। वह न तो कभी रास्ता बदलता था और न ही देर करता था। लेकिन उस रात जब वह निर्धारित समय पर घर नहीं पहुंचा, तो परिजनों की चिंता बढ़ गई। परिवार ने तुरंत उसकी तलाश शुरू की और नजदीकी थाने पहुंचकर पुलिस को सूचना दी।

आरोप है कि रात के समय थाने पहुंचे परिजनों को पुलिस ने गंभीरता से नहीं लिया और यह कहकर लौटा दिया कि “अब रात हो चुकी है, सुबह देखा जाएगा।” परिवार का कहना है कि यदि उसी समय तलाशी शुरू होती, तो शायद कमल की जान बच सकती थी।

सुबह करीब 7:30 बजे पुलिस की ओर से फोन आया, जिसके बाद परिजन मौके पर पहुंचे। वहां का दृश्य दिल दहला देने वाला था। सड़क पर एक बड़ा, गहरा और खुला गड्ढा था, जिस पर न तो कोई बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी बोर्ड। कमल की बाइक उसी गड्ढे में गिरी हुई थी और कमल का शव भी वहीं मिला।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि सड़क पर चल रहे निर्माण या मरम्मत कार्य के दौरान यह गड्ढा खोदा गया था, लेकिन सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं किए गए। रात के अंधेरे में कमल को यह गड्ढा दिखाई नहीं दिया और वह सीधे उसमें जा गिरा।

इस घटना के बाद इलाके में आक्रोश का माहौल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी नोएडा में इसी तरह खुले गड्ढे में गिरने से एक युवक की मौत हो चुकी है, लेकिन प्रशासन ने कोई सबक नहीं लिया।

परिजनों ने पुलिस और संबंधित विभाग पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क पर खुले गड्ढे और पुलिस की उदासीनता दोनों ही इस मौत के जिम्मेदार हैं।

फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही नगर निगम और निर्माण एजेंसी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। यह घटना एक बार फिर सवाल खड़े करती है कि आखिर कब तक खुले गड्ढे लोगों की जान लेते रहेंगे और कब प्रशासन नींद से जागेगा।